महाराष्ट्र विविध पर्यटन स्थलों का एक बेहतरीन संगम है, जिसमें मुंबई के आधुनिक नज़ारे, छत्रपति संभाजीनगर की प्राचीन अजंता-एलोरा गुफाएँ, महाबलेश्वर और लोनावला जैसे हिल स्टेशन, और शिरडी जैसी धार्मिक जगहें शामिल हैं। यह राज्य ऐतिहासिक किलों, खूबसूरत समुद्र तटों और सह्याद्री की पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है।
महाराष्ट्र के प्रमुख पर्यटन स्थल:
महाराष्ट्र में घूमने की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगह:
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक:
मुंबई की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगह: गेटवे ऑफ इंडिया, ताज होटल, मरीन ड्राइव, सिद्धिविनायक मंदिर|
छत्रपति संभाजीनगर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगह: अजंता और एलोरा की गुफाएँ(UNESCO विश्व धरोहर)बीबी का मकबरा|
पुणे की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगह:: शनिवार वाड़ा, आगा खान पैलेस।
किले: रायगढ़ किला, प्रतापगढ़ किला, देवगिरि-दौलताबाद किला।
हिल स्टेशन (प्रकृति प्रेमी)( महाराष्ट्र के हिल स्टेशन)
महाबलेश्वर: वेन्ना झील और स्ट्रॉबेरी के बागान।
लोनावला-खंडाला: झरने और घाटियाँ।
माथेरान: कार-मुक्त हिल स्टेशन।
पंचगनी: टेबल लैंड।
धार्मिक स्थल:
शिरडी: साईं बाबा मंदिर।
महाराष्ट्र में घूमने की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगह:
गेटवे ऑफ इंडिया

गेटवे ऑफ इंडिया मुंबई का सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक और पर्यटन स्थल है। यह दक्षिण मुंबई में अरब सागर के किनारे अपोलो बंदर क्षेत्र में स्थित है।
गेटवे ऑफ़ इन्डिया (भारत का प्रवेशद्वार) भारत के मुम्बई शहर के दक्षिण में समुद्र तट पर स्थित एक स्मारक है। स्मारक को दिसंबर 1911 में अपोलो बंडर, मुंबई (तब बॉम्बे) में ब्रिटिश सम्राट राजा-सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी के प्रथम आगमन की याद में बनाया गया था। शाही यात्रा के समय, प्रवेशद्वार का निर्माण नहीं हुआ था, और सम्राट को एक कार्डबोर्ड संरचना के द्वारा बधाई दी गयी थी।
16वीं शताब्दी के गुजराती वास्तुकला के तत्वों को शामिल करते हुए, भारतीय-इस्लामी वास्तुकला शैली में निर्मित इस स्मारक की आधारशिला मार्च 1913 में रखी गई थी। वास्तुकार जॉर्ज विटेट द्वारा स्मारक का अंतिम डिजाइन 1914 में स्वीकृत किया गया था, और इसका निर्माण 1924 में पूरा हुआ था। 26 मीटर (85 फीट) ऊँची इस संरचना का निर्माण असिताश्म (बेसाल्ट) से किया गया है और यह एक विजय की प्रतीक मेहराब है। इस प्रवेशद्वार के पास ही पर्यटकों के समुद्र भ्रमण हेतु नौका-सेवा भी उपल्ब्ध है।
मुख्य जानकारी और इतिहास:
निर्माण का कारण: इसका निर्माण 1911 में ब्रिटिश सम्राट किंग जॉर्ज पंचम और रानी मैरी के भारत आगमन की याद में किया गया था।
वास्तुकार (Architect): इसे प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार जॉर्ज विटेट ने इंडो-सारासेनिक शैली में डिजाइन किया था।
निर्माण काल: इसकी आधारशिला 31 मार्च 1911 को रखी गई थी और यह 1924 में बनकर पूरी तरह तैयार हुआ।
ऐतिहासिक महत्व: 28 फरवरी 1948 को भारत छोड़ने वाली अंतिम ब्रिटिश रेजिमेंट इसी द्वार से होकर वापस गई थी, जो भारत में ब्रिटिश शासन के अंत का प्रतीक बना|
संरचना और विशेषताएं:
ऊंचाई: यह स्मारक 26 मीटर (85 फीट) ऊंचा है और पीले बेसाल्ट पत्थर व कंक्रीट से बना है।
स्थान: इसके ठीक सामने प्रसिद्ध ताजमहल पैलेस होटल स्थित है और पास ही छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगी हुई है|
गतिविधियाँ: यहाँ से एलिफेंटा गुफाओं (Elephanta Caves) और अलीबाग जाने के लिए नियमित नौका (फेरी) सेवा उपलब्ध रहती है।
पर्यटकों के लिए सुझाव:
समय: यह जनता के लिए 24 घंटे खुला रहता है। सुबह जल्दी जाना शांतिपूर्ण होता है, जबकि शाम को यहाँ काफी चहल-पहल और रौनक रहती है|
प्रवेश: यहाँ प्रवेश बिल्कुल निःशुल्क है, किसी टिकट की आवश्यकता नहीं है|
कैसे पहुँचें: आप मुंबई लोकल ट्रेन से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) या चर्चगेट स्टेशन पर उतर सकते हैं, जहाँ से टैक्सी या बस द्वारा यहाँ पहुँचा जा सकता है|
ताज होटल

ताज होटल, विशेष रूप से मुंबई का ‘द ताज महल पैलेस’, भारत का एक प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक 5-सितारा लग्जरी होटल है, जिसे 1903 में जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित किया गया था। टाटा ग्रुप की सहायक कंपनी, IHCL द्वारा संचालित, ये होटल अपनी शानदार वास्तुकला, शानदार आतिथ्य और गेटवे ऑफ इंडिया के पास प्रमुख स्थानों (जैसे मुंबई, दिल्ली) के लिए प्रसिद्ध हैं।
ताज महल होटल ११६ साल पुरानी इमारत है। मुंबई की पहचान बन चुकी इस इमारत में महानगर के अमीर और संभ्रांत लोग आते-जाते रहते हैं। विदेशी पर्यटकों में भी गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास स्थित ताज महल होटल काफ़ी लोकप्रिय है। ताज महल होटल से समुद्र का दृश्य दिखाई देता है। २६ नवम्बर २००८ मुंबई में श्रेणीबद्ध गोलीबारी के समय यह होटल लगभग ६० घंटों तक आतंकवादियों ने अपने कब्ज़े में कर रखा था।
ताज होटल के बारे में मुख्य बातें:
स्थापना: मुंबई में पहला ताज होटल 16 दिसंबर, 1903 को खोला गया था।
अवस्थिति (मुंबई): यह कोलाबा में गेटवे ऑफ इंडिया के ठीक बगल में स्थित है|
प्रकार: यह होटल अपनी बेहतरीन वास्तुकला और सेवाओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
नई परियोजनाएं: नोएडा के सेक्टर 129 में 1000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एक नया और ऊंचा ताज होटल और ब्रांडेड रेजिडेंस बनाया जा रहा है, जो 5 साल में बनकर तैयार होगा।
समूह: ताज होटल्स, ‘टाटा ग्रुप’ की इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) का हिस्सा हैं।
मरीन ड्राइव

यह दक्षिण मुंबई में अरब सागर के किनारे स्थित 3.6 किलोमीटर लंबा ‘C’ आकार का मार्ग है।
मरीन ड्राइव के बारे में मुख्य बातें:
क्वीन्स नेकलेस: रात के समय यहाँ की स्ट्रीट लाइटें जलने पर यह एक मोतियों की माला की तरह दिखता है, इसलिए इसे ‘क्वीन्स नेकलेस’ (रानी का हार) कहा जाता है।
प्रमुख आकर्षण: इसके एक छोर पर नरीमन पॉइंट और दूसरे छोर पर गिरगाँव चौपाटी स्थित है। पास ही में वानखेड़े स्टेडियम और तारापोरेवाला एक्वेरियम जैसे स्थान हैं।
गतिविधियाँ: यहाँ लोग सुबह-शाम टहलने, जॉगिंग करने और सूर्यास्त का आनंद लेने आते हैं।
मरीन ड्राइव का इतिहास: इसका निर्माण १९२० के दशक में समुद्र को भरकर (land reclamation) किया गया था। यहाँ की आर्ट डेको इमारतों को UNESCO विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है।
सिद्धिविनायक मंदिर

मुंबई के प्रभादेवी में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर भगवान गणेश को समर्पित सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध मंदिरों में से एक है। 19 नवंबर 1801 को लक्ष्मण विठ्ठू और देऊबाई पाटिल द्वारा निर्मित, इस मंदिर की मूर्ति में गणेश जी की सूंड दाईं ओर झुकी हुई है। यहाँ प्रतिदिन हज़ारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, और यह मंदिर अपनी सिद्धियों व मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए जाना जाता है।
सिद्धिविनायक मंदिर के मुख्य तथ्य और विशेषताएँ:
स्थान: प्रभादेवी, मुंबई, महाराष्ट्र।
स्थापना: 19 नवंबर 1801।
मूर्ति की विशेषता: यहाँ गणेश जी की 2.5 फीट ऊँची प्रतिमा काले पत्थर से बनी है, जिसकी सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है (दाहिनावर्ती)। प्रतिमा के चारों हाथों में कमल, कुल्हाड़ी, माला और मोदक है।
विशेष मान्यता: भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है।
समय: मंदिर आमतौर पर सुबह 5:30 बजे से रात 9:50 बजे तक खुला रहता है, मंगलवार को विशेष भीड़ होती है।
प्रसिद्ध दर्शन: मंदिर की आरती और दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं।
यह मंदिर अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी शानदार वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है, जहाँ लाखों लोग बप्पा का आशीर्वाद लेने आते हैं।
छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद)जिले में स्थित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक:(tourist places):
- अजंता और एलोरा की गुफाएँ(UNESCO विश्व धरोहर)
- बीबी का मकबरा|
अजंता और एलोरा की गुफाएं

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित अजंता और एलोरा की गुफाएं (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल) प्राचीन भारतीय वास्तुकला, चित्रकला और शिल्प के बेजोड़ उदाहरण हैं। अजंता (लगभग 30 गुफाएं) मुख्य रूप से बौद्ध भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि एलोरा (34 गुफाएं) हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म से संबंधित अपने रॉक-कट मंदिरों के लिए जानी जाती है, जिसमें कैलाश मंदिर सबसे प्रमुख है।
अजंता और एलोरा की गुफाओं के बारे में मुख्य तथ्य:
स्थान: महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में,अजंता और एलोरा की गुफाओं है। दोनों के बीच लगभग 100 किमी की दूरी है।
निर्माण काल: इनका निर्माण 200 ईसा पूर्व से 10वीं शताब्दी ईस्वी के बीच किया गया था।
अजंता की गुफाएं (Ajanta Caves):
विशेषता: 29-30 गुफाएं, जो मुख्य रूप से बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित विहार (निवास) और चैत्य (प्रार्थना हॉल) हैं।
कला: इनमें भित्ति चित्र (Fresco paintings) हैं, जिनमें बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं का चित्रण है।
खोज: 1819 में ब्रिटिश अधिकारी जॉन स्मिथ द्वारा खोजी गई।
एलोरा की गुफाएं (Ellora Caves):
विशेषता: 34 गुफाओं का समूह, जो हिंदू (13-29), बौद्ध (1-12) और जैन (30-34) धर्मों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
कैलाश मंदिर (गुफा 16): यह दुनिया का सबसे बड़ा अखंड (एकल चट्टान से निर्मित) संरचना है, जो राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम द्वारा बनवाया गया था।
यूनेस्को विश्व धरोहर: दोनों को 1983 में यूनेस्को की सूची में शामिल किया गया।
समय: ये गुफाएं सुबह से शाम तक (सूर्योदय से सूर्यास्त) खुली रहती हैं, और अजंता की गुफाएं सोमवार को बंद रहती हैं।
ये गुफाएं न केवल धार्मिक, बल्कि प्राचीन भारत की बेहतरीन इंजीनियरिंग और कला के प्रतीक हैं।
बीबी का मकबरा

बीबी का मकबरा, जिसे ‘दक्कन का ताज’ (Taj of the Deccan) कहा जाता है, महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में स्थित एक ऐतिहासिक स्मारक है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी (1660 के दशक) में औरंगजेब के बेटे, आजम शाह ने अपनी मां दिलरस बानो बेगम की याद में करवाया था। यह मुगल वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो देखने में काफी हद तक ताजमहल जैसा दिखता है।
बीबी का मकबरा के मुख्य तथ्य:
स्थान: छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र।
निर्माता: मुगल बादशाह औरंगजेब के पुत्र आजम शाह (अपनी मां दिलरस बानो बेगम की याद में)।
निर्माण काल: 1650-1660 के बीच।
वास्तुकला: यह ताजमहल की एक प्रतिकृति है, लेकिन संगमरमर का कम उपयोग होने के कारण इसे अक्सर “गरीबों का ताजमहल” भी कहा जाता है।
विशेषता: स्मारक के चारों कोनों पर चार बड़ी मीनारें हैं और बीच में मुख्य मकबरा है।
अन्य नाम: दक्कन का ताजमहल या ‘ताज ऑफ द डेक्कन’।
यह स्मारक अपनी सुंदर वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, और आज एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।
पुणे: शनिवार वाड़ा, आगा खान पैलेस।
शनिवार वाड़ा

शनिवार वाड़ा महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्थित एक ऐतिहासिक किला और महल है, जो 18वीं सदी में मराठा साम्राज्य के पेशवाओं का मुख्य निवास स्थान था।
मुख्य ऐतिहासिक जानकारी:
निर्माण: इसका निर्माण पेशवा बाजीराव प्रथम ने 10 जनवरी 1730 (शनिवार) को शुरू करवाया था, जिसके कारण इसका नाम ‘शनिवार वाड़ा’ पड़ा। यह 1732 में बनकर तैयार हुआ था।
वास्तुकला: यह किला मराठा और मुगल वास्तुकला का मिश्रण है। इसमें पांच मुख्य दरवाजे हैं, जिनमें सबसे बड़ा ‘दिल्ली दरवाजा’ है। महल के अंदर कभी ‘हजारी करंजे’ (हजार फव्वारों वाला तालाब) इसकी भव्यता का केंद्र था।
दुखद घटनाएँ: 1828 में एक भीषण आग लगने के कारण महल का अधिकांश हिस्सा नष्ट हो गया था, और अब केवल इसकी बाहरी दीवारें और बुनियाद ही शेष हैं।
रहस्य: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ पेशवा नारायणराव की हत्या उनके रिश्तेदारों के आदेश पर कर दी गई थी। माना जाता है कि आज भी अमावस्या की रात को उनके ‘काका मला वाचवा’ (चाचा मुझे बचाओ) चिल्लाने की आवाजें सुनाई देती हैं, जिसके कारण इसे भारत के डरावने स्थानों में गिना जाता है।
पर्यटकों के लिए जानकारी
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | पुणे, महाराष्ट्र |
| खुलने का समय | सुबह 9:30 से शाम 5:30 (प्रतिदिन) |
| टिकट | ₹25 (भारतीय दर्शकों के लिए) |
| मुख्य आकर्षण | दिल्ली दरवाजा, मस्तानी दरवाजा, लाइट एंड साउंड शो, और सुंदर बगीचे |
शनिवार वाड़ा के पास ही प्रसिद्ध दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर और लाल महल भी स्थित हैं, जहाँ आप घूमने जा सकते हैं|
आगा खान पैलेस

आगा खान पैलेस पुणे, महाराष्ट्र में स्थित एक ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प धरोहर है, जिसका निर्माण 1892 में सुल्तान मुहम्मद शाह आगा खान III ने करवाया था। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख स्थल है, जहाँ 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान महात्मा गांधी, उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई को नज़रबंद करके रखा गया था।
आगा खान पैलेस के मुख्य आकर्षण और विवरण:
ऐतिहासिक महत्व: कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई का निधन इसी पैलेस में हुआ था, और यहाँ उनकी समाधियाँ बनी हुई हैं।
वास्तुकला: यह 19 एकड़ में फैला हुआ है और इसकी वास्तुकला इंडो-सारासेनिक (Indo-Saracenic) शैली का एक शानदार उदाहरण है, जिसमें विशाल हॉल, मेहराब और लंबी बालकनियाँ हैं।
गांधी स्मारक: अब यह स्थान गांधी स्मारक समिति के अंतर्गत एक संग्रहालय (Museum) के रूप में काम करता है, जहाँ गांधी जी के जीवन से जुड़ी वस्तुओं और चित्रों को प्रदर्शित किया गया है।
स्थान और समय: यह पुणे के येरवडा में स्थित है, और पर्यटकों के लिए खुला है। यहाँ के भव्य उद्यान और शांतिपूर्ण माहौल इसे फोटोग्राफी के लिए एक बेहतरीन स्थान बनाते हैं।
प्रवेश शुल्क: भारतीय नागरिकों के लिए ₹25 और विदेशी नागरिकों के लिए ₹300 का टिकट है।
यह स्थान न केवल अपनी सुंदरता, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय के लिए भी जाना जाता है।
रायगढ़ किला
किले: रायगढ़ किला, प्रतापगढ़ किला, देवगिरि-दौलताबाद किला।

रायगढ़ किला महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला की ‘रायरी’ पहाड़ी पर स्थित एक ऐतिहासिक दुर्ग है। यह मराठा साम्राज्य की शान और छत्रपति शिवाजी महाराज की रणनीतिक कुशलता का प्रतीक है।
ऐतिहासिक किले की जानकारी:
स्वराज्य की राजधानी: शिवाजी महाराज ने 1656 में जवाली के चंद्रराव मोरे से इस स्थान को जीता और इसे अपनी राजधानी घोषित किया।
राज्याभिषेक: 6 जून 1674 को इसी किले पर शिवाजी महाराज का ऐतिहासिक राज्याभिषेक हुआ, जहाँ उन्होंने ‘छत्रपति’ की उपाधि धारण की।
मराठा शक्ति का केंद्र: यह किला मराठा प्रशासन और सैन्य अभियानों का मुख्य केंद्र रहा।
किले की संरचना और प्रमुख आकर्षण:
किले का निर्माण मुख्य अभियंता हिरोजी इंदुलकर की देखरेख में हुआ था।
महा दरवाजा: यह किले का मुख्य प्रवेश द्वार है, जो अपनी भव्यता और सुरक्षात्मक बनावट के लिए जाना जाता है।
राजसभा: यहाँ शिवाजी महाराज का भव्य सिंहासन (सिंहासन की प्रतिकृति) स्थित है।
जगदीश्वर मंदिर और समाधि: किले के परिसर में भगवान शिव का मंदिर और छत्रपति शिवाजी महाराज की पवित्र समाधि स्थित है|
टकमक टोक: एक खड़ी चट्टान जहाँ से अपराधियों को दंड स्वरूप नीचे फेंका जाता था।
बाजार पेठ: एक मील लंबा बाजार जहाँ घोड़ों पर बैठकर खरीदारी की जा सकती थी|
कैसे पहुँचें?
मुंबई से: सड़क मार्ग से लगभग 140-150 किमी (3-4 घंटे)।
पुणे से: सड़क मार्ग से लगभग 150 किमी (4-5 घंटे)।
निकटतम रेलवे स्टेशन: वीर दासगाँव (Vir Dasgaon) जो लगभग 40 किमी दूर है।
प्रतापगढ़ किला

प्रतापगढ़ किला महाराष्ट्र के सतारा जिले में महाबलेश्वर के पास स्थित एक ऐतिहासिक पहाड़ी दुर्ग है। छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा 1656-57 में निर्मित यह किला, 10 नवंबर 1659 को शिवाजी महाराज और बीजापुर के जनरल अफजल खान के बीच हुई ऐतिहासिक लड़ाई के लिए प्रसिद्ध है। यह किला मराठा साम्राज्य के शौर्य और रणनीतिक वास्तुकला का प्रतीक है।
प्रतापगढ़ किले की मुख्य विशेषताएं:
ऐतिहासिक महत्व: यहाँ अफजल खान का वध किया गया था, जो मराठा इतिहास की एक निर्णायक घटना थी।
अवस्थिति: यह महाबलेश्वर से लगभग 24 किमी की दूरी पर सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में स्थित है।
निर्माण: इस किले का निर्माण छत्रपति शिवाजी महाराज के आदेश पर मोरोपंत पिंगले ने 1656-1657 में करवाया था।शिवाजी महाराज के आदेश पर मोरोपंत पिंगले ने इसका निर्माण करवाया था और इसका प्रबंधन हिरोजी इंदुलकर ने किया था।
संरचना: किले के दो मुख्य भाग हैं – निचला किला (Lower Fort) और ऊपरी किला (Upper Fort)। यहाँ भवानी माता का मंदिर और शिवाजी महाराज की एक प्रतिमा भी स्थित है।
पर्यटन: यह एक लोकप्रिय ट्रैकिंग स्थल है, जहाँ से आसपास की घाटियों के मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं।
यात्रियों के लिए सुझाव:
कैसे पहुँचें: महाबलेश्वर से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
सबसे अच्छा समय: मानसून के बाद और सर्दियों का समय (सितंबर से मार्च) सबसे अच्छा है।
देवगिरि-दौलताबाद किला
देवगिरि-दौलताबाद किला महाराष्ट्र के संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिले में स्थित एक मध्यकालीन ऐतिहासिक दुर्ग है। यह अपनी अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

मुख्य ऐतिहासिक तथ्य:
स्थापना: इसकी स्थापना 12वीं शताब्दी (लगभग 1187 ई.) में यादव राजा भिल्लम पंचम ने की थी और इसे ‘देवगिरि’ नाम दिया था।
राजधानी परिवर्तन: 1327 ई. में दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से यहाँ स्थानांतरित की और इसका नाम बदलकर ‘दौलताबाद’ (समृद्धि का शहर) रख दिया।
अजेय दुर्ग: इस किले को इतिहास में कभी भी सैन्य बल से नहीं जीता जा सका, इसे केवल छल या घेराबंदी से ही जीता गया।
मुख्य आकर्षण
चाँद मीनार: 1445 ईस्वी में अलाउद्दीन बहमन शाह द्वारा निर्मित 210 फीट ऊँची यह मीनार विजय का प्रतीक है|
चीनी महल: यह कभी भव्य महल था, लेकिन बाद में औरंगजेब ने इसे गोलकुंडा के अंतिम राजा को कैद करने के लिए जेल के रूप में इस्तेमाल किया।
तोपें: किले के ऊपरी हिस्से पर ‘किला शिकन’ जैसी विशाल तोपें आज भी देखी जा सकती हैं|
पर्यटकों के और जानकारी
ऊँचाई: किले के शिखर तक पहुँचने के लिए लगभग 750-777 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
समय: यह किला प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक खुला रहता है।
स्थान: यह संभाजीनगर शहर से लगभग 15-20 किमी की दूरी पर स्थित है और एलोरा गुफाओं के रास्ते में पड़ता है।
हिल स्टेशन (प्रकृति प्रेमी)
महाबलेश्वर
महाबलेश्वर:महाबलेश्वर में वेन्ना झील और स्ट्रॉबेरी के बागान है।
महाबलेश्वर महाराष्ट्र के सतारा जिले में सह्याद्री पर्वतमाला में स्थित एक प्रसिद्ध और सुरम्य हिल स्टेशन है, जो लगभग 4,500 फीट की ऊंचाई पर है। यह अपने सदाबहार वनों, गगनचुंबी चोटियों, आकर्षक घाटियों और विशेष रूप से स्ट्रॉबेरी के उत्पादन के लिए मशहूर है, जिसे भारत का ‘स्ट्रॉबेरी कैपिटल’ भी कहा जाता है।
महाबलेश्वर, महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित एक प्रमुख हिल स्टेशन है, जो मुख्य रूप से अपने सुहावने मौसम, स्ट्रॉबेरी के खेतों, प्राचीन महाबलेश्वर मंदिर और मनोरम दृश्यों (व्यू पॉइंट्स) के लिए प्रसिद्ध है। यह पश्चिमी घाट में 1,372 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जिसे “दक्कन की रानी” भी कहा जाता है|

महाबलेश्वर के मुख्य आकर्षण:
व्यू पॉइंट्स (Points): आर्थर सीट (घाटी के दृश्य के लिए), एलीफेंट हेड पॉइंट, बॉम्बे पॉइंट (सनसेट), और विल्सन पॉइंट (सूर्योदय)।
ऐतिहासिक स्थल: प्रतापगढ़ किला (शिवाजी महाराज और अफजल खान से संबंधित)।
मंदिर: प्राचीन महाबलेश्वर मंदिर (भगवान शिव) और पंचगंगा मंदिर, जो पांच नदियों का उद्गम स्थल है।
प्रकृति और मनोरंजन: वेन्ना लेक (बोटिंग) और लिंगमाला वॉटरफॉल।
खान-पान: मेप्रो गार्डन (Mapro Garden) में स्ट्रॉबेरी के साथ क्रीम का आनंद लेना और बागों की सैर|
यात्रा का सबसे अच्छा समय:
दिसंबर से फरवरी के बीच मौसम सुहावना और आरामदायक होता है, जो घूमने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है।
लोनावला-खंडाला
लोनावला-खंडाला: झरने और घाटियाँ।
लोनावला और खंडाला महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित प्रमुख और लोकप्रिय जुड़वां हिल स्टेशन हैं, जो मुंबई से लगभग 96 किमी और पुणे से 64 किमी दूर हैं। सह्याद्री पहाड़ियों में बसे ये स्थल अपनी हरियाली, झरनों, गुफाओं (कारला और भाजा) और घाटियों (राजमाची पॉइंट) के लिए प्रसिद्ध हैं, जो मानसून में बेहद खूबसूरत हो जाते हैं।

लोनावला-खंडाला की मुख्य बातें:
सर्वोत्तम समय: मानसून (जून-सितंबर) और सर्दियों का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा है।
प्रमुख आकर्षण:
लोनावला: भुशी डैम, राजमाची पॉइंट, लॉयंस पॉइंट (टाइगर पॉइंट), लोनावला झील, और सुनील वैक्स म्यूजियम।
खंडाला: खंडाला झील, कुने वॉटरफॉल, शूटिंग पॉइंट, और राजमाची उद्यान।
प्रसिद्धि: यह स्थान अपनी ‘चिक्की’ (एक प्रकार की मिठाई) और चिक्की के उत्पादन के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है।
गतिविधियाँ: ट्रेकिंग, प्रकृति वॉक, पिक्सनिक और एडवेंचर पार्क (डेला)।
कैसे पहुँचें: लोनावला रेलवे स्टेशन मुख्य मार्ग पर है और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के जरिए सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है|
माथेरान
माथेरान: माथेरान एक ऐसी जगा है जहाँ पे कार और ऑटोमोबाईल्स का उपयोग नही किया जाता इसीलिए उसे कार मुक्त हिल स्टेशन कहा जाता है।
माथेरान महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित एक छोटा, खूबसूरत और प्रसिद्ध हिल स्टेशन है, जो पश्चिमी घाट में लगभग 2,650 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह एशिया का एकमात्र ऑटोमोबाइल-मुक्त हिल स्टेशन है, जहाँ प्रदूषण रहित शांत वातावरण और शानदार प्राकृतिक दृश्य मिलते हैं। यह मुंबई (80 किमी) और पुणे (120 किमी) के पास एक लोकप्रिय सप्ताहांत गेटवे है।

माथेरान के बारे में मुख्य जानकारी:
वाहन प्रतिबंध: यहाँ मोटर वाहनों के प्रवेश पर रोक है; आप केवल पैदल, घोड़े की सवारी या हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे से घूम सकते हैं।
टॉय ट्रेन: नेरल से माथेरान तक की टॉय ट्रेन यात्रा बहुत लोकप्रिय है, जिसे यहाँ की “रानी” कहा जाता है।
प्रमुख आकर्षण: यहाँ 30 से अधिक व्यू पॉइंट्स हैं, जैसे लुईसा पॉइंट, दस्तूर पॉइंट, और मंकी पॉइंट, जहाँ से मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं।
घूमने का सही समय: मानसून (अगस्त) की हरियाली के लिए या अक्टूबर से मई के बीच का समय सबसे अच्छा है।
स्थानीय विशेषता: यहाँ की प्रसिद्ध चिक्की (Chikki) जरूर आजमाएं|
कैसे पहुंचें
ट्रेन: नेरल जंक्शन सबसे करीबी स्टेशन है।
सड़क: दस्तूरी पॉइंट तक निजी वाहनों की अनुमति है, जिसके आगे चलना पड़ता है।
हवाई जहाज: मुंबई (100 किमी) या पुणे (120 किमी) निकटतम हवाई अड्डे हैं।
पंचगनी

पंचगनी: टेबल लैंड।
पंचगनी महाराष्ट्र के सतारा जिले में सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। इसे ‘पाँच पहाड़ियों की भूमि’ भी कहा जाता है क्योंकि यह पाँच पहाड़ियों से घिरा हुआ है। समुद्र तल से लगभग 1,334 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान अपने ठंडे मौसम, प्राकृतिक सुंदरता और स्ट्रॉबेरी के खेतों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है|
पंचगनी में घूमने की प्रमुख जगहें:
टेबल लैंड (Table Land): यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा ज्वालामुखी पठार है, जहाँ से पहाड़ों का शानदार नज़ारा दिखता है। यहाँ घुड़सवारी काफी लोकप्रिय है।
पारसी पॉइंट (Parsi Point): यहाँ से कृष्णा घाटी और धोम बांध का मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य दिखाई देता है।
सिडनी पॉइंट (Sydney Point): यह जगह कृष्णा घाटी, धोम बांध और वाई की पहाड़ियों के नज़ारों के लिए जानी जाती है।
मैप्रो गार्डन (Mapro Garden): यह अपनी ताज़ा स्ट्रॉबेरी, जैम और अन्य फलों के उत्पादों के लिए मशहूर है।
धोम बांध (Dhom Dam): यहाँ आप बोटिंग और वॉटर स्पोर्ट्स का आनंद ले सकते हैं।
यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी:
घूमने का सबसे अच्छा समय: सितंबर से मई के बीच का समय सबसे सुखद होता है। मानसून (जून-सितंबर) के दौरान यहाँ की हरियाली और झरने देखने लायक होते हैं।
कैसे पहुँचें:
हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा पुणे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 110 किमी) है।
रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन सतारा (45 किमी) और पुणे हैं।
सड़क मार्ग: मुंबई और पुणे से बस या अपनी गाड़ी से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
धार्मिक स्थल: शिरडी के साईं बाबा मंदिर महाराष्ट्र का लोकप्रिय धार्मिक स्थल हैं।
शिरडी: साईं बाबा मंदिर।
शिर्डी महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित एक प्रमुख तीर्थस्थल है, जो 19वीं सदी के संत साईं बाबा का घर होने के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान श्रद्धा और सबुरी (धैर्य) का प्रतीक है। मुख्य आकर्षण श्री साईं बाबा समाधि मंदिर, द्वारकामाई, चावड़ी और साईं प्रसादालय हैं, जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

शिर्डी के प्रमुख आकर्षण और जानकारी:
मुख्य मंदिर: साईं बाबा का मुख्य समाधि मंदिर, जहाँ उनके दर्शन होते हैं।
द्वारकामाई: वह स्थान जहाँ साईं बाबा अपना अधिकांश समय बिताते थे और लोगों के कल्याण के लिए चमत्कार दिखाते थे।
चावड़ी: यहाँ साईं बाबा रात में विश्राम करते थे।
साईं प्रसादालय: विश्व का सबसे बड़ा सोलर किचन, जहाँ हर दिन हजारों भक्त मुफ्त भोजन करते हैं।
अन्य स्थान: दीक्षित वाड़ा संग्रहालय, खंडोबा मंदिर (जहाँ बाबा को ‘साईं’ नाम मिला), और लेडी बाग।
त्यौहार: गुरुवार को विशेष पालकी यात्रा का आयोजन किया जाता है।
यात्रा का समय: साल भर जाया जा सकता है, लेकिन साईं बाबा की समाधि के कारण दशहरा के समय विशेष भीड़ रहती है।
आवास: मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित साईं भक्त निवास में किफायती दर पर कमरे उपलब्ध हैं।
कैसे पहुँचें: शिरडी में अपना रेलवे स्टेशन (साईं नगर शिरडी) है। इसके अलावा, नासिक (लगभग 90 किमी) और औरंगाबाद निकटतम हवाई अड्डे/बड़े स्टेशन हैं।
